Tuesday, August 14, 2012

Darkness...

अँधेरा  

अँधेरा भी ख़ूबसूरत है,
ये सोते हुओँ को जगाता है,
रोतों को सुलाता है,
जब कुछ समझ  में न आये तो 
निराशा को भी यही भुलाता है।

अँधेरा उम्मीद भी लाता है,
उजाला  तो सिर्फ तरक्की  वाले लोग ही दिखाता  है,
 मगर अँधेरा तो पिछड़े हो को भी साथ ले आता है।

अँधेरा एकता का सन्देश भी लाता है,
उजाला जो कई रंग दिखलाता है,
एक अजीब सा भेद भाव फैला जाता है ,
ये अँधेरा ही है जो सबके लिए बराबर से आता है,
रात के धुंधलके में सब कुछ समेट सा ले जाता है।

ये अँधेरा ही है जिसके जाने का गम नहीं होता ,
यही है देता वो तसल्ली तो उजाला नहीं है दे पाता।
आता हुआ वो अँधेरा और जाता हुआ वो उजाला,
एक नयी आने वाली वाली सुबह का ऐसे कुछ पैगाम देता है जाता,
की मन उस पल में कही खो सा जाता।

खूबसूरत है ये अँधियारा.
आभास दिलाता है ये हर पल कल है एक नया उजियारा ।


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