Friday, August 3, 2012

Someday-A Dream

One day I was traveling and these words just appeared in my mind, though I completed it today but it was in my head from last few days.

एक दिन-एक ख्वाब 


बात है ये कल की,
आते हुए रास्ते में झपकी लग गयी।

एक अनोखा ख्वाब आया तब,
भौंचक्का हूँ मैं जिसपे अब तक।

जा पहुंचा था मैं उड़ के एक ऐसी जगह,
लोग कर रहे थे तारीफे अपने देश-ओ-वतन की हर तरह।

हम भी आखिर हिंदुस्तान के रहने वाले है,
बोलने की अगर चैम्पियनशिप हो तो उसमे गोल्ड मैडल लाने वाले है।

बस हिन्दुस्तानी खून ने मारा जोर,
और हमने हुंकार भर कर मचाना शुरू किया शोर।

बोले हम, देश है हमारा महान,
अलग है की नेता हैं यहाँ सबसे ज्यादा धनवान।

आँखें मूँद के चलना यहाँ सबको भाता है,
 अलग है की यहाँ का इंसान किसी पंगे में नहीं पड़ना चाहता है।

देश हमारा धर्मनिरपेक्ष का नारा है,
अलग है की आरक्षण के लिए गुटों का बंटवारा है।

सरकारें हमारी सीधी सादी  है,
अलग है की जेबें खुद अपनी भरती जाती हैं।

जनता हमारी भोली है,
अलग है की सिर्फ जाम लगा के ही बोली है।

लाखों कमियों वाला देश हमारा है,
अलग है की लहराते तिरंगे को सलामी देने को हाथ अपने आप उठ सा जाता है।
  
इतने में आँख खुली तो पाया खुद को सकते है,
फिर मैं बोला खुद से 'सपना ही होगा ये वर्ना नहीं हो सकता ये मेरे जागते में।'

No comments:

Post a Comment