Thursday, August 16, 2012

Independece day.. a country of dreams

It was independence day yesterday and I was thinking what we have achieved in past years. The words came out automatically for this progress which have done in making our country:

सपनों का वतन 
एक देश था मेरे अपनों का,
गाँधी और भगत के सपनों का,

वो देश जो होगा सपनों का जहाँ,
हर कोई होगा अपना 
पराया न कोई होगा वहां 

देश जो था उनके सपनों  का जहाँ,
खो गया है जाने आज कहाँ 

जो धरती कभी थी पूजी जाती 
उसी पे आज खून की नदियाँ है बहती

सबसे आगे रहते थे जो किसान,
मजबूर हैं आज लेने को खुद की वो जान

जाओ जहां भी रहते थे सभी प्रेम से 
आज देखो जाति  के नाम पे लड़ रहे हर एक से,

जनता भी तो थी हमारी भोली भाली सी,
रिश्वत दे दे कर आज कर चुकी अपनी झोली खाली भी 

एक देश था मेरे अपनों का,
गाँधी और भगत के सपनों का,
आएगा फिर एक दिन,
जब होगा ये भारत देश महानों का


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